इतिहास

बैतूल जिला- एक परिचय

भारत की हृदय स्थली में स्थित बैतूल जिला परित्र ताप्ती नदी के उद्गम स्थल का गौरव प्राप्त किये हुए है। दिल्ली मद्रास मुख्य लाईन पर भोपाल नागपुर के मध्य में स्थित है। अकबर महान के नौ रत्नों में से एक रत्न टोडरमल के द्वारा कराये गये सर्वेक्षण से ज्ञात अखंड भारत के केन्द्र बिन्दु पर बसा यह जिला आदिवासी संस्कृति को उद्घाटित करता है।

भौगोलिक स्थिति

आदिवासी बाहुल्य जिला बैतूल के दक्षिण में सतपुडा की श्रृंखलाओं में फैला हुआ है। उत्तर में नर्मदा की घाटी और दक्षिण में बरार का मैदार है। यह जिला 21”22′ से 22”23′ उत्तरी अक्षांश एवं 77”-10′ से 78”-33′ देशांश के मध्य स्थित है। इसके उत्तर में होशंगाबाद जिला, दक्षिण में महाराष्ट्र प्रदेश का अमरावती जिला, पूर्व में छिंदवाडा जिला और पश्चिम में पूर्व निमाड (खण्डवा) जिला है।

पर्वत श्रृंखला

बैतूल जिला सतपुड़ा की पर्वत श्रृंखलाओं में समुद्र सतह से 365 मीटर और इससे अधिक उंचाई पर बसा हुआ है। पर्वत श्रृंखला पूर्व की ओर अधिक उंची है। जो पश्चिम की ओर कम होती जाती है। औसत उंचाई 653 मीटर उंची है। चार भागों में विभाजित श्रृंखलाएं (1) सतपुडा पर्वत श्रृंखला (2) तवा मोरण्ड घाटी (3) सतपुडा पठार के बीच में (4) ताप्ती की घाटी है।

सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के दोनो ओर तवा और नर्मदा स्थित है। श्रृंखला में कई उूंची चोटियां है। जिनमें सबसे उंची चोटी पूर्व में किलनदेव 1107 मीटर है। चोटियों पर ही पुराने किले बने थे, जो पूरे क्षेत्र में प्रशासन के लिए उपयोगी थे। तवा घाटी समुद्र सतह से 396 मीटर उंचाई पर है। घाटी का अधिक भाग कीमती वृक्षों (पमुख सागौन) से ढंका हुआ है और किनारे की भूमि उपजाउ है।

सतपुड़ा का पठार, जिले के पूर्वी भाग में उंची-उंची चोटियां उत्तर तक फैली है। इसमें सबसे उंचा पठार 685 मीटर चैडी पटटी के रूप में फैला है। मुलताई तहसील 791 मीटर, भैंसदेही तहसील के खामला ग्राम के पश्चिम की ओर सबसे उंची चोटी 1137 मीटर है जो प्रदेश की पचमढी के बाद दूसरी उंची चोटी है ताप्ती घाटी 15 मीटर लंबी और 20 मीटर चैडी पट्टिका के रूप में है, जो दामजीपुरा तक फैली है।

नदियाॅ:-

जिले की प्रमुख नदियों में से ताप्ती, तवा, माचना, वर्धा, बेल, मोरण्ड एवं पूर्णा आदि है। ताप्ती दक्षिण की प्रमुख नदियों में से एक, जो पुराणों के अनुसार सूर्य पुत्री महलाई है। इसका उद्गम मुलतापी (मुलताई) में स्थित तालाब से माना जाता है। वस्तुतः यह मुलताई के उत्त्र में सतपुड़ा का पठार से 790 मीटर उंचाई से 21”48′ उत्तुर से 78”15′ पूर्व से निकली है, जो गुजरात प्रदेश के सूरत जिले से होती हुई अरब सागर में जा मिलती है। इसकी कुल लंबाई 701.6 किलोमीटर है।
तवा नदी जिले के उत्तर पूर्व से प्रवेश करती है, जेा छिंदवाड़ा जिले से निकली है। इसमें आगे माचना नदी मिल जाती है, जो ढोढरामोहार के आगे होशंगाबाद जिले में प्रवेश करती है। जिस पर रानीपुर के पास बहुउद्देशीय वृहद परियोजना (तवा बांध) का निर्माण किया गया है। जिले के सारनी ग्राम में स्थित सतपुड़ा थर्मल पावर स्टेशन के उपयोग हेतु बांध बनाया गया है।

वर्धा नदी मुलताई तहसील के उत्त्र पूर्व से निकलकर 35 किलोमीटर दूरी पार कर महाराष्ट्र प्रदेश में प्रवेश करती है। जो आगे चलकर चन्द्रपुर जिले के वेनगंगा नदी में मिल जाती है। (467 किलोमीटर) माचना नदी जिले के पूर्व से निकलकर उत्तर की ओर बैतूल उत्तरी सीमा पर बहती है और ढोढरामोहार के पास तवा नदी में मिल जाती है। जिसकी कुल लंबाई 185 किलोमीटर है।